{हिंदी} Top 7+ Frog Story in Hindi with Moral

Frog Story in Hindi

Frog Story in Hindi नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हमने यहां पर Frog in Hindi कहानी शेयर की है। इन Frog Motivational Story in Hindi को पढ़कर आपको बहुत मजा आएगा साथ ही कहानी से आप सभी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

यहां पर हमने अलग-अलग Frog Story with Moral शेयर की है। जो पढ़ने में छोटी लगेगी, पर इनके पीछे बहुत अच्छे और प्यारे शीर्षक छुपा है। आपको इसे पुरा जरूर पढ़ना चाहिए।

1. Frog Story in Hindi – कुएं में मेंढक ( The Frog in The Well Story)

Frog Story in Hindi

समुद्र से थोड़ी दूर पर एक कुएं में काला बड़ा मेंढक रहता था। उसका उसी कुएं में जन्म हुआ था इसलिए वह उससे बाहर कभी नहीं गया था। वह था तो संसार के बारे में अज्ञानी परंतु स्वयं को सबसे बड़ा ज्ञानी समझता था। वह कुए के अंदर ही जीव जंतुओं को खाकर अत्यंत प्रसन्न था। एक दिन समुद्र का एक मेंढक रास्ता भूल कर कुएं के पास आ गया तथा अचानक एक तेज आवाज के साथ कुएं में गिर पड़ा।

कुएं का मेंढक सो रहा था परंतु आवाज सुनकर जाग गया। कुएं का मेंढ़क बोला- ऐ अजनबी तुम कौन हो और तुम यहां क्या कर रहे हो?
बाहर से आए हुए मेढ़क ने कहा मैं समुद्र से आया हूं और रास्ता भटक गया हूं।
कुएं का मेढ़क- क्या ये वाकई सच्च है की तुम समुद्र से आए हो।
बाहर से आए हुए मेढ़क- हां ये सच्च है।

कुएं का मेंढक को आश्चर्य हुआ- समुद्र इस कुएं जितना है?
बाहर से आए हुए मेढ़क- मेरे प्यारे दोस्त समुद्र की तुलना इस छोटे कुएं से कैसे कर सकते हो?
कुएं का मेंढक – तो क्या तुम्हारा समुद्र मेरे कुएं से बढ़ा है?
बाहर से आए हुए मेढ़क – मूर्खों जैसी बात मत करो समुद्र की तुलना कौन से कैसे हो सकती है? तुम्हारे इस कुएं से कई हजार गुना बड़ा है हमारा समुद्र समझगए।

कुएं का मेंढक इस बात को सह नहीं सका उसे लगता था कि उसका कुआं सबसे बड़ा है। समुद्र से आया हुआ मेंढक अब उसे बुरा लगने लगा।

कुएं का मेंढक- तुम बहुत बड़े झूठे हो तुम अपने आप को महान सोच रहे हो तुम्हारा समुद्र मेरे कुएं से बड़ा नहीं हो सकता मैं तुम पर विश्वास नहीं कर सकता।

बाहर से आए हुए मेढ़क- ऐसा इसलिए क्योंकि तुमने अभी तक समुद्र नहीं देखा है मेरे साथ चलो तुम्हें दिखाता हूं कि समुद्र कैसा है।

कुएं का मेंढक- मैं तुम्हारी बातों पर नहीं फंसने वाला मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तुम मुझे समुद्र में छोड़कर इस कुएं के राजा बनना चाहते हो। इसलिए तुम मुझसे यह कह रहे हो। अब तुम यहां से तुरंत चले जाओ।

कुए की मेंढक की बातें सुनकर समुद्र से आया हुआ मेंढक बहुत दुखी हुआ क्योंकि वह तो उसे सही जानकारियां देना चाहता था फिर उसने निर्णय लिया कि अब इस अज्ञानी को वह कुछ नहीं बताएगा और बिना कुछ बोले वह प्रसन्नता पूर्वक कुएं से बाहर निकल गया।

कुए के सभी जीव जंतु को खाता हुआ काला बड़ा मेंढक पहले की तरह ही कुएं में खुशी-खुशी रहने लगा।

सीख – कुएं के मेंढक की भांति किसी को भी दूसरो के प्रति दृष्टिकोण नहीं अपनाना चाहिए।

2. Frog Motivational Story in Hindi – दो मछलियां और एक मेंढक ( Two Fishes And A Frog in Hindi)

एक बार दो मछलियां मीकू और चीकू वह एक मेंढक तारा और उसकी पत्नी के साथ रहते थे। सब लोग तालाब के तट के पास साथ-साथ रहते थे। एक शाम उन्होंने कुछ मछुआरे को उनके पास आते हुए देखा उनके पास बड़े-बड़े जालै थे जिसमें ढेर सारी मछलियों से थी। जिनको इन मछुआरों ने पकड़ा था।

तालाब से गुजरते समय मछुआरों ने देखा कि वहां पर बहुत सारी मछलियां हैं। तो मछुआरों ने तालाब देख अगली सुबह आने का फैसला किया और अपने रास्ते चले गए। मछुआरों को देख सभी मछलियां खबरा गयी और आपस में इससे बचने का उपाय ढूंढने लगे।

अगले सुबह मछुआरे वापस आए और अपनी जाल को बिछा दिया उन्होंने जाल में बहुत कुछ पकड़ा मीकू और चीकू ने छुटने की बहुत कोशिश की पर उनकी कोई भी चाल काम नहीं आई। मछुआरों के जाल में फंसे हुए चीकू और मीकू तलाब के तट पर अपनी आखिरी सांसे ले रहे थे।

तारा और उसकी पत्नी ये दूर से ही देख रहे थे और आपस में बात करते हुए कह रहे थे‌ की आकाश चीकू और भीकू मेरी बात सुन लेते, उनकी बेवकूफी और घमंडी ने उनकी जान ले ली।

सीख– रोकथाम इलाज से बेहतर है मुसीबत को महसूस करते ही अपने आप को बचाने की तुरंत कोशिश करें।

3. Frog Motivational Story in Hindi – समझदार मेढ़क ( Motivational Story of Frog & The Well )

एक बार कुछ मेंढक एक गहरे और सूखे कुएं में गिर गए उनमें से हर एक ने उस कुएं से निकलने के लिए बहुत कोशिश की पर वें बाहर नहीं निकल पाएं जब कोई भी मेंढ़क ऊपर चढ़ने लगता तो बाकी सब मेढ़क नीचे से जोर-जोर से चिल्लाने लगते- अरे ये तुम क्या कर रहे हो क्यों मरना चाहते हो! कुएं से निकलने नामुमकिन है! तुम कभी बाहर नहीं निकल पाओगे कुएं के दिवार बहुत ऊंची और फिसलन भरी है। अगर तुम थोड़ा ऊपर चढ़ भी गए तो नीचे गिरकर मर जाओगे। नीचे आ जाओ।

ये सब बेकार और नकारात्मक बात सुनकर ऊपर चढ़ने वाला हर कोई मेढ़क हिम्मत हार जाता है और नीचे गिर जाता है। फिर मेंढ़कों ने ऊपर चढ़ना ही छोड़ दिया और वे सब उसी कुएं में रहने लगे वहीं उनकी दुनिया बन गई। समय बीतता गया मेंढ़कों में कई नए मेंढ़क पैदा हुए इनमें से एक मेंढ़क ने कुएं से बाहर निकलने के बारें में पूछा तो बाकि मेंढ़कों ने उसे इस सफलता की ढेरों कहानी सुना दी और कहां की ये नामुमकिन है।

कुएं से बाहर नहीं निकला जा सकता परंतु इस जवान मेंढ़क को कुएं के अंधेरे और सीमित जिंदगी से नफरत होने लगी थी। इसलिए उसने ठान लिया कि मैं इस कुएं से बाहर निकल कर ही दम लूंगा। अब मैं अंधेरे में और नहीं रह सकता। कुएं के बाहर रंगीन दुनिया, ताजी हवा और पानी के बड़ें तालाबों में रहने की इच्छा ने कुएं से बाहर निकलने की उसकी भूख और बढ़ा दी थी।

अगली बार उसने फैसला किया और वह ऊपर चढ़ने लगा उसे ऊपर चढ़ता देख बाकी मेंढ़क नीचे से जोर-जोर चिल्लाने लगे की पागल नीचे उतर जा तू बेवकूफ है जो इस नामुमकिन काम को करने चला है। जब बड़े-बड़े ताकतवर इस दीवार पर नहीं चढ़ पाएं तो तू क्या चढ़ेगा।

तेरा अंतिम समय आ गया है ऊपर से गिरकर तेरी मौत होगी लेकिन उस मेंढ़क ने की दिनों तक कुएं की दीवार का अध्ययन किया था‌ और ऊपर चढ़ने का अभ्यास भी किया था। इसी के बदौलत वह ऊपर चढ़ता गया और आखिरकार वह ऊपर पहुंचने में कामयाब हो ही गया।

उसने यह नामुमकिन काम कर दिखाया था। ऊपर पहुंचकर वह बहुत खुश हुआ और खुद को शाबाशी देने लगा क्योंकि वह बिना उन बाकी मेंढ़कों की नेगेटिव एंव निराशाजनक बातों पर ध्यान दिए बिना लगातार ऊपर चढ़ता गया अगर वह जरा भी उनकी बातों पर ध्यान देता तो शायद वह इस नामुमकिन काम को मुमकिन करके ना दिखा पाता।

4. Frog Story with Moral – मेंढ़क और चूहा ( Frog and Mouse Story in Hindi )

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एक मेंढ़क एक छोटे से तालाब में रहता था। तालाब के निकट बरगद का पेड़ था। पेड़ के नीचे एक चूहा रहता था। दोनों बहुत अच्छे मित्र थे और एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे‌। एक दिन गर्मियों के दोपहर में मेंढ़क ने चूहे को तालाब के ठंडे पानी में तैरने की सलाह दी चूहे ने जवाब दिया- नहीं मैं पानी में नहीं उतर सकता क्योंकि मुझे तैरना नहीं आता।

मेंढ़क ने सुझाव दिया की मैं तुम्हारे अगले पैरों को अपने पिछले पैरों से बांध लूंगा तब तुम भी मेरे साथ तैर सकोगे। चूहे को मेढ़क का सुझाव पसंद आया वह बोला हां यह विचार अच्छा है। फिर दोनों ने रस्सी से अपने पैरों को बांधा और तालाब में कूद गए मेंढ़क तैर सकता था‌ इसलिए वह तैरने का आनंद उठा रहा था।

लेकिन चूहे का क्या हुआ चूहे के कान, मुंह तथा नाक में पानी भर गया और दम घुटने के कारण वो मर गया। तैरने के पश्चात जब मेंढक पानी से बाहर आया तो मृत चूहा भी उसके साथ निकल आया। मेंढक ने चूहा का शरीर टटोला उसे अनुभव हुआ कि चूहा मर चुका है। अभी तालाब के ऊपर उड़ते हुए एक बाज ने मृत चूहे को देखा, बाज नीचे की ओर गोता मारकर उतरा और चूहे को अपने पंजे में दबोच लिया ऐसे में चूहे के साथ बंधक मेढ़क भी ना बच पाया।

सीख- कुछ भी करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए।

5. Frog Story in Hindi with Moral – छाछ में दो मेंढ़क (Two Frogs in Buttermilk)

एक जमाने की बात है एक गांव था उस गांव में एक ग्वाला रहता था। वह ग्वाला हर दिन दूध का दही जमा देता था और फिर उसमें से वह छाछ बनाता था। वह उस छाछ से बहुत सारा मक्खन भी निकल लेता था।

एक दिन उस ग्वाले ने छाछ बनाई और जल्दी-जल्दी में उस छाछ के मटके को ऐसे ही खुला छोड़कर अपने काम के लिए चला गया। उस ग्वाले से घर पर लगकर दो मेंढ़क रहा करते थे। वे दो मेढ़क ऐसे ही घर के आजू-बाजू घूमते-घूमते घर के खिड़की पर आकर बैठ गए।

उस खिड़की से दोनों मेंढ़कों ने उस रखें हुए छाछ की तरफ देखा और फिर छलांग लगाकर उस मटके में वह जा गिरें, उस मटके में रखें हुए छाछ में वह तैरने लगे और फिर उस मटके से बाहर आने की कोशिश करने लगे।

दोनों मेंढ़कों ने बाहर आने की कोशिश की पर उन कोशिशों के बाद भी दोनों उस मटके के बाहर नहीं निकल पाए। कुछ कोशिश करने के बाद एक मेंढ़क निराश हो गया और बोला ‘मुझे नहीं लगता मैं यहां से निकल पाऊंगा। शायद मैं यहीं पर दम तोड़ने वाला हूं। मैं मरने ही वाला हूं तो बचने की कोशिश कर्मों करूं।

ऐसा सोचकर उसने हाथ पांव मारकर तैरना छोड़ दिया और आखिरकार वह मेंढ़क उस छाछ में डूबके मर गया लेकिन दूसरे मेंढ़क ने हार नहीं मानी वह हाथ पैर मारता रहा वह तैरने की कोशिश करता रहा और उसने लगातार हाथ पैर मारने के कारण उस छाछ का खूब मंथन हुआ और धीरे-धीरे उसमें मक्खन जमने लगा।

जैसे ही मक्खन तैयार हुआ तो वह मक्खन उस छाछ के सतह पर आ गया और उस मक्खन का आधार लेकर वह मेंढ़क एक छलांग में उस मटके के बाहर आ गया। इस तरह से उसके लगातार कोशिश की वजह से वह उस संकट से अपनी जान बचा पाया।

सीख- हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और अंत: किसी भी परिस्थिति में हार मानकर कभी कोशिश करनी नहीं छोड़नी चाहिए।


हमें उम्मीद है की आपको हमारी Frog Story in Hindi पढ़ कर जरूर मजा आया होगा। यह Frog Motivational Story in Hindi, Frog Story with Moral न केवल बच्चों को पढ़ने में अच्छी लगती है बल्कि यह बड़े लोगों के मनोरंजन का साधन भी बनती है और हमें अपना गुजरा हुआ कल याद दिलाती है। यदि आपको हमारी कर्मों का फल कहानियाँ पसंद आयी हो तो आप हमकों इसके बारे में नीचे comment भी कर सकते है।


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