{हिंदी} Best 9+ Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story with Moral

Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हमने यहां पर जैसी करनी वैसी भरनी कहानी शेयर की है। इन प्रेरणादायक कहानियों (जैसी करनी वैसी भरनी) से आपको जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा एवं इसका महत्व समझ आएगा‌।

जैसी करनी वैसी भरनी- हाथी और दर्जी का बेटा (Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story)

Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story

एक समय की बात है दौलतपुर गांव के एक किनारे पर गणेश भगवान का मंदिर था। मंदिर के पास ही एक हाथी रहता था। वह गांव से जि़धर भी जाता लोग गणेश जी की जय कहकर उसका स्वागत करते‌‌। गांव के लोग उससे बहुत प्यार करते थे। सभी उसको खाने के लिए कुछ न कुछ अवश्य देते कोई केले देता तो कोई गन्ना, कोई हरी-हरी पत्तियों वाली टहनियां देता।

हाथी सबकुछ प्रेम से स्वीकार करता। वह भी गांव वालों से बहुत प्रसन्न रहता। बच्चों का झुंड देखकर वह बैठ जाता और बच्चों को अपनी पीठ पर बैठाकर गांव में घुमा लाता था।

हाथी रोज सुबह गांव के दूसरे किनारे पर बने तालाब पर नहाने के लिए जाता था। मंदिर से तालाब के रास्ते में एक दर्जी की दुकान थी। दर्जी और हाथी में बड़ा घनिष्ठ संबंध था।

दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे। हाथी जब उधर से गुजरता दर्जी उसे केले, गन्ने, लड्डू कुछ न कुछ अवश्य देता। हाथी उसे खाता और तालाब की ओर बढ़ जाता।

तालाब में वह मस्त होकर नहाता और लौटते हुए अपनी सूँड में पानी भर लाता। दर्जी की दुकान के पास आकर वह अपनी सूँड का सारा पानी दुकान के बाहर छिड़क देता।

इस तरह दुकान के सामने साफ-सफाई दिखती। गांव के लोग हाथी और दर्जी की इस दोस्ती की तारीफ करते‌। एक बार की बात है दर्जी पास के गांव में अपने रिश्तेदार के यहां गया हुआ था और दुकान पर दर्जी का जवान बेटा बैठा हुआ था।

रोज की तरह हाथी दर्जी की दुकान के आगे आकर रूक गया उसने थोड़ी देर इंतज़ार किया फिर अपने सूँड दुकान के अंदर बढ़ाई मानो खाने के लिए कुछ मांग रहा हो पर उस लड़के ने उसे खाने के लिए कुछ नहीं दिया।

बदले में उसने हाथी के सूँड में सुई चुभो दी। हाथी दर्द से पीछे हट गया और चुपचाप तालाब की ओर चला गया। नहाने के बाद हाथी ने अपनी सूँड में गंदा पानी भर लिया।

हाथी जब दर्जी के दुकान के पास आया तो खड़ा हो गया और दुकान की ओर सूँड करके उसने सारा गंदा पानी दुकान के अंदर उड़ेल दिया और वापस मंदिर की ओर चला गया।

दर्जी के दुकान के सारे कपड़े गंदे पानी पड़ने से खराब हो गए। दूसरे दिन जब दर्जी दुकान पर आया तो दुकान की हालात देखकर हैरान रह गया। उसने अपने लड़के से पूछा तो उसने सारी बात बताई।

दर्जी ने लड़के को बहुत डाँट लगाई और बोला ‘जैसी करनी वैसी भरनी।”

जैसी करनी वैसी भरनी- लालची दुकानदार (Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story)

एक बार की बात है किसी गांव में एक किसान था जोकि दूध और दही से मक्खन बनाकर उसे बेचकर घर चलाता था। एक दिन उसकी पत्नी ने उसे मक्खन तैयार करके दिया वह उसे बेचने के लिए अपने गांव से शहर की तरफ रवाना हो गया।

वह मक्खन गोल-मोल पेडो की शक्ल में बना हुआ था‌ और हर पेडे का वजन एक किलोग्राम था। शहर में किसान ने उस मक्खन को रोज की तरह एक दुकानदार को बेच दिया और दुकानदार से चायपत्ती, चिनी, रसोई का तेल और साबुन आदि खरीदकर वापस अपने गांव जाने के लिए रवाना हो गया।

किसान के जाने के बाद दुकानदार ने मक्खन को फ्रिज में रखना शुरू कियाप परंतु उसे अचानक ख्याल आया की क्यों न इसमें से एक पेडे का वजन चेक किया जाए।

वजन तोलने पर पेडा सिर्फ 900 ग्राम का निकला, हैरानी और परेशानी में दुकानदार ने सारे पेडे तोल डाले मगर किसान के सारे पेडे 900 ग्राम के ही निकले।

अगले हफ्ते फिर किसान हमेशा की तरह मक्खन लेकर जैसे ही दुकानदार की दहलीज पर चढ़ा‌ दुकानदार ने चिल्लाते हुए कहां दफा हो जा यहां से किसी बेईमान और धोखेबाज शख्स से कारोबार करना पर मुझसे नहीं।

900 ग्राम मक्खन को पूरा 1 किलोग्राम बनाकर बेचने वाले शख्स की शक्ल मैं फिर से देखना गवारा नहीं करता मैं, किसान ने बड़ी विनम्रता से दुकानदार को कहां मेरे भाई मुझसे नाराज़ बिल्कुल भी ना हो हम तो गरीब और बेचारे लोग हैं।

हमारे पास माल तोलने के लिए वजन काटा खरीदने की हैसियत नहीं है। आपसे जो एक किलोग्राम चीनी लेकर जाता हूं उसी को तराजू के एक पलड़े पर रखकर दूसरे पलड़े पर उतना ही वजन का मक्खन तोलकर ले आता हूं।

जो हम दूसरों को देंगे वहीं लौटकर आएगा फिर चाहे वह इज्जत, सम्मान हो या फिर धोखा अब जो देते हैं बदले में हमें वहीं मिलता है। यहीं संसार का नियम है।

जैसी करनी वैसी भरनी- गोलू और भोलू (Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story)

Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story

एक समय की बात है भोलु और गोलू नामक दो कोवे अच्छे मित्र थे। एक दिन उन दोनों में अपनी-अपनी श्रेष्ठता करने में झगड़ा होने लगा‌। तब उन्होंने तय किया की वह दोनों एक-दूसरे को चुनौती देंगे और जो चुनौती को पूरा कर लेगा वहीं श्रेष्ठ होगा।

चुनौती यह थी की दोनों को अपने चोंच में एक भरा हुआ थैला लेकर उड़ना था। जो अपने थैले को लेकर आकाश में अधिक ऊपर उड़ेगा वहीं श्रेष्ठ होगा। गोलू बहुत ही चालाक कौआ था। उसने अपने थैले में रूई और भोलू के थेले में नमक भरा और दोनों ने उड़ान भरी।

जल्दी ही थेले का वजन कम होने के कारण गोलू अधिक उड़ने लगा और भारी वजन होने के कारण भोलू ऊंची उड़ान भरने में असमर्थ था। तभी बारिश शुरू हो गई। रूई पानी सोखने के कारण भारी हो गई और नमक घुलनशील होने के कारण पानी में घुल गया‌।

इसके फलस्वरूप गोलू का थेला भारी और भोलू का थेला हल्का हो गया। अब भोलू ने गोलू के मुकाबले अधिक ऊंची उड़ान भरी। इस तरह भोलू वह चुनौती जीत गया। इसीलिए दोस्तों हमेशा याद रखें जैसी करनी वैसी भरनी।

अच्छा करोगे तो अच्छा पाओगे, बुरा करोगे तो उसका फल भी बुरा ही मिलेगा।

जैसी करनी वैसी भरनी- गरीब मछुआरे और कानू (Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story)

एक गांव में पवन नाम का एक गरीब मछुआरे रहता था। गांव के आसपास के तालाबों से ही वह मछली पकड़ता था किसी दिन उसे मछली मिलती थी और किसी दिन उसे मछली नहीं मिलती थी।

लेकिन वह था बहुत नेक और उसका भगवान के ऊपर बहुत विश्वास था। एक दिन तालाब में मछली पकड़ते-पकड़ते उसके जाल में बहुत बड़ी मछली फंस गई‌। वह मछली को देखकर सोचने लगा की वह इस मछली को नहीं बेचेगा और घर जाकर सभी परिवार के साथ इस मछली को खाएगा।

इतना सोचकर वह अपने घर के तरफ चल दिया। रस्ते में उसे कानू नाम का गांव का गुंडा मिला और उस गुंडे ने पवन से वह मछली छीन ली, पवन अब क्या करें इसलिए उसने गहरी सांस लेकर फिर से उदास होकर मछली पकड़ने चला गया और इस तरफ जब कानू अपने घर लौट रहा था तो उस मछली ने कानू के साथ में काट लिया।

कानू को उस वक्त कोई दर्द महसूस नहीं हुआ लेकिन कुछ ही दिनों में उसके हाथों के ऊपर संक्रमण हो गया फिर वह डाक्टर के पास आया और डॉक्टर ने उसके उंगली पर दवा लगाया और बोला चार दिन बाद तुम मेरे यहां पर फिर से आना।

चार दिन बाद वह जब फिर से डॉक्टर के पास गया फिर डॉक्टर ने पट्टी हटाकर देखा की वह संक्रमण ओर फैल गया। फिर डॉक्टर ने कानू से कहां की तुम्हारी उंगली काटनी पड़ेगी अगर ऐसा नहीं किया तो बाद में पूरा हाथ काटना पड़ेगा।

कानू ने डॉक्टर का कहना माना और डॉक्टर ने उसकी वह उंगली काट दी और पट्टी लगा दी। इसके बाद कानू फिर 4 दिन बाद डॉक्टर के पास गया डॉक्टर ने पट्टी हटाई तो देखा की वह संक्रमण ओर फैल गया है।

इसके बाद डॉक्टर ने कहा की अब कलाई तक काटनी पड़ेगी। और फिर डॉक्टर ने कलाई तक हाथ काट दीं। डॉक्टर ने फिर से 4 दिन बाद आने की सलाह दी लेकिन संक्रमण रूकने का नाम ही ले रहा था। डॉक्टर ने कानू का पूरा हाथ काट दिया पर भी संक्रमण रूकने का नाम नहीं ले रहा था।

फिर कानू ने सोचा की अगर ऐसा ही चलता रहा तो अब मुझे मेरा शरीर काटना पड़ेगा। हार-थककर कानू एक साधु बाबा के पास पहुंचा जहां उसने सारी बात बताई यह सुनकर साधु बाबा ने कानू से पूछा क्या तुमने किसी के साथ कभी कोई बुरा काम किया है।

तो कानू ने कहां हां मैंने एक गरीब मछुआरे से उसकी मछली जबरदस्ती छीन ली थी। यह सुनकर बाबा ने बोला ये तुमने अत्यंत गलत काम किया है और तुम जहां कहीं से उस आदमी को ढूंढ कर निकालो और उससे मांफी मांगों वहीं तुम्हें इस पीढ़ा से मुक्ति दे सकता है।

कानू ने बहुत लोगों से पूछताछ की ओर पवन के गांव में आ पहुंचा और उसने पवन को ढूंढ निकाला और उसके चरणों में गिरकर कहा की तुम मुझे माफ कर दो तुमने मुझे ये क्या श्रार्प दिया है की मेरा आज यह हालात हो गया है।

यह सुनकर पवन ने कहा मैंने तुम्हें कोई श्रार्प नहीं दिया है मैंने बस भगवान से कहा था की भगवान इस आदमी ने मुझे इसकी शक्ति दिखाई है तो तुम इस आदमी को तुम्हारी शक्ति दिखा दो।


हम आशा करते हैं हमारे द्वारा दी गई  Jaisi Karni Vaisi Bharni Hindi Story पढ़कर आपको जरूर मजा आया होगा‌। यह  जैसी करनी वैसी भरनी कहानी, प्रेरणादायक कहानियां न केवल बच्चों को पढ़ने में अच्छी लगती है बल्कि यह बड़े लोगों के मनोरंजन का साधन भी बनती है और हमें अपना गुजरा हुआ कल याद दिलाती है। यदि आपको यह कहानियां पसंद आयी हो तो आप हमकों इसके बारे में नीचे Comment भी कर सकते हैं।


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