Best 9+ Lovely True Friendship Story in Hindi with Moral

True Friendship Story in Hindi नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हमने यहां पर सच्ची दोस्ती पर कहानी (Best Friendship Story in Hindi) शेयर की है। इन मित्रता पर छोटी कहानी में आपको जीवन में दोस्ती का महत्व क्या होती है बहुत अच्छे से पता चल पायेगा‌।

दोस्ती के बिना जीवन बहुत अधूरा है। जीवन में एक दोस्त ही होते हैं जो हमारे बुरे-अच्छे वक्त में साथ रहते है। दोस्ती की कोई परिभाषा नहीं होती है लेकिन यह रिश्ता ऐसा होता है जो हमेशा दिल से निभाया जाता है । आज हम यहां पर आपको दोस्ती की क्या एहमियत होती है A Very Short Story About Friendship in Hindi के माध्यम से बताएंगे।

यहां पर हमने अलग-अलग मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी फॉर स्टूडेंट्स शेयर की है। जो पढ़ने में छोटी लगेगी, पर इनके पीछे सच्ची दोस्ती का महत्व छुपा है। आपको इसे पुरा जरूर पढ़ना चाहिए।

1. True Friendship Story in Hindi – सच्चा मित्र 

 

True Friendship Story in Hindi

एक वन में एक तालाब था‌। तालाब में एक बड़ा सा कछुआ रहता था‌। तालाब के किनारे एक वृक्ष था जिस पर एक कौआ रहता था‌। पास ही झाड़ियों में एक हिरन भी रहता था।

तीनों में मित्रता हो गई। सुबह-शाम तीनों मिलते, एक-दूसरे का हाल-चाल पूछते और हँसी-मजाक करके अपना समय गुजारते। एक दिन एक मछवारा तालाब में जाल डालकर कछुए को पकड़ लिया।

मछुवारे ने कछुए को रस्सी से बांधकर एक लाठी पर टाँगा और चल दिया। अपने मित्र को संकट में देख कौआ और हिरन चिंता में पड़ गए। उन्हें पता था की मछुआरा उनके मित्र को मारकर खा जाएगा। वे कछुए को बचाने का कोई उपाय सोचने लगे।

काफी सोच-विचार के बाद उन्हें एक उपाय सूझ गया। उसके बाद हिरन उस रास्ते पे जाकर लेट गया। जहां से मछुवारा कछुए को लेकर गुजरने वाला था। कौआ भी वहीं पास के एक पेड़ पर जा बैठा।

हिरन एकदम मुरझा बनकर लेटा हुआ था। एक मछुआरे ने रास्ते में एक मोटा-तगड़ा हिरन मरा पड़ा देखा तो उसे लालच आ गया। उसने सोचा ‘कछुआ तो है ही क्यों न इस हिरन को भी उठा कर ले चलूँ। इसकी चमड़ी बेचने से काफी धन मिलेगा‌’।

मछुआरे के पास एक ही रस्सी थी‌ जिससे उसने कछुए को बाँधा हुआ था‌। उसने कछुए को खोलकर एक तरफ छोड़ दिया। मुक्त होते ही कछुआ चुपचाप खेतों में घुस गया और तालाब की ओर चल दिया‌‌।

मछुआरा लाठी लेकर कछुए वाली रस्सी से हिरन को बाँधने के लिए उसकी तरफ़ बढ़ा। जैसे ही वो हिरन के पास पहुंचा पेड़ के डाली पर बैठा कौआ बोल उठा, काँव, काँव। अपने मित्र कौए की आवाज सुनते ही हिरन उछलकर भाग खड़ा हुआ‌।

मछुआरा बेचारा देखता रह गया‌। इस तरह उसे न तो कछुआ मिला, न हिरन‌। शाम ढलने पर तीनों मित्र तालाब के किनारे मिले। कछुए ने अपने प्राण बचाने के लिए कौए और हिरन को धन्यवाद देना चाहा तो वे बोले ‘धन्यवाद की कोई आवश्यकता नहीं, मित्र! सुख-दुख में काम आने वाले ही तो सच्चे मित्र होते है।

2. Best Friendship Story in Hindi – संजना और श्यामा

संजना और श्यामा दोनों गहरे मित्र थे। उनकी सच्ची दोस्ती के सभी कायल थे। बचपन में दोनों एक साथ गांव में ही पढ़े थे‌। संजना के पिता व्यापारी थे‌। वह बहुत अमीर थे और श्यामा के पिता एक गरीब किसान थे‌।

श्यामा के माता-पिता ने कड़ी मेहनत करके श्यामा को पढ़ा लिखा रहे थे‌। संजना को अपने धन पर बिल्कुल भी घमंड नहीं था‌। जिसके चलते उनमें गहरी दोस्ती बनी रही थी। श्यामा गरीब होने के बावजूद भी हमेशा संजना की मदद किया करती थी। एक दिन की बात है संजना और श्यामा एग्जाम के लिए जा रहे थे जोकि गांव से ज्यादा दूर था इसलिए संजना और श्यामा दोनों साइकिल से स्कूल जाया करती थी।

लेकिन एग्जाम के कारण संजना थोड़ा जल्दी निकल गई। उसकी साईकिल रास्ते में खराब हो गई। संजना ने बहुत कोशिश की पर साईकिल ठीक नहीं हुई‌। उसे स्कूल पहुंचने में काफी देर हो रही थी‌‌। बाद में जब श्यामा साइकिल से आ रही थी तो उसने देखा कि संजना रूकी हुई है वह तुरंत रुक गई और उसकी सहायता के लिए चल पड़ी।

उसने संजना की साइकिल को ठीक कर दिया। अब दोनों एग्जाम देने के लिए चले गए। समय बीतता गया दोनों बड़े हो गई और संजना अपने पिताजी के साथ शहर में बिजनेस करने लगी पर श्यामा पैसों की कमी के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाई।

जिसके कारण उन दोनों का मिलना बहुत कम हो गया। एक बार की बात है श्यामा के पिताजी काफी बीमार हो गए थे‌। डॉक्टर ने कहा कि शहर जाकर इनका इलाज कराना जरूरी है। लेकिन श्यामा के पास पैसे नहीं थे। वह परेशान हो गई थी कि इतने सारे पैसे वह कहां से लाएगी।

अब उसने सोचा की शहर जाना ही पड़ेगा इसलिए उसने रिश्तेदारों से थोड़े पैसे ले लिए थे‌। अब श्यामा पिताजी को शहर ले आई‌ और एक अच्छे अस्पताल में भर्ती करवाया। डॉक्टर ने कहा इनके इलाज में लगभग लाखों रुपए खर्च हो जाएंगे।

इतना सुनता ही श्यामा परेशान हो गई कि वह लाख रुपए कहां से लाएगी। बाद में संजना को पता चला की श्यामा के पिताजी का इलाज शहर में चल रहा है।

वह श्यामा से मिलने के लिए शहर चली गई और डॉक्टर को पैसे दिए और श्यामा के पिताजी का इलाज शुरू हो गया और वह कुछ दिन में ठीक हो गए। जल्दी ही वह वापस आ गए। बाद में वह दोनों मित्र फिर से मिल गए।

सीख – हमें हमेशा अपने दोस्तों की मदद करनी चाहिए और विपरीत परिस्थितियों में उनका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

3. Best Friendship Story in Hindi – दो शेरों की दोस्ती

एक जंगल में दो शेर अपने-अपने परिवार के साथ बहुत ज्यादा खुश रहते थें। लेकिन एक दिन उन दोनों शेरों के बीच में किसी वजह से बहुत ज्यादा झगड़ा हो गया था।

अब वह दोनों ही एक दूसरे से बिल्कुल भी बात नहीं करते थे। ऐसा करते हुए उन दोनों शेरों को 1 साल बीत गया था। लेकिन इस बात से उन दोनों शेरों के परिवार बिल्कुल भी खुश नहीं थे क्योंकि उन दोनों शेरों के बच्चे एक साथ खाना खाया करते थे और वे सभी एक साथ खेलते भी थे।

लेकिन जब उन दोनों शेरों का झगड़ा हुआ था तबसे उनके परिवार का मिलना जुलना बिल्कुल बंद हो चुका था। दोनों शेरों को एक-दूसरे से बात करने का बड़ा मन था लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि वे दोनों बहुत ज्यादा जिद्दी और गुस्से वाले थे।

लेकिन एक दिन दोनों परिवार में से एक परिवार के पास 15 से 20 जंगली कुत्ते आ गए और वो उनको यहां-वहां नोचने लगे तभी इतने में सारे कुत्ते देखकर पहला शेर और उसका परिवार बहुत ज्यादा डर गया पहला शेर यह सोच रहा था कि शायद अब तो मेरा दोस्त भी मुझें बचाने नहीं आएगा।

लेकिन ये क्या उसका शेर दोस्त बड़ी तेजी के साथ अपने जिगरी दोस्त को बचाने आ गया और उन जंगली कुत्तों को केले के छिलके की तरह फाड़ कर फेंकने लगा। कुछ ही देर में उन दोनों शेर दोस्तों ने मिलकर उन सभी कुत्तों को मार-मारकर भगा दिया।

जब वो कुत्ते भाग गए तो उसका शेर दोस्त बिना बोले ही वापस अपनी जगह पर जाकर परिवार के साथ बैठ गया। तभी शेर के बेटे ने अपने पिताजी से पूछा कि पिताजी आप तो अपने दोस्त से बात भी नहीं करते थे फिर आपने उन्हें और उनके परिवार को उन जंगली कुत्तों से क्या बचाया।

तभी उसके पिता शेर ने कहा कि बेटा भलें ही नाराजगी कितनी हो मगर दोस्ती इतनी भी कमजोर नहीं होनी चाहिए कि कुत्ते भी उसका फायदा उठा ले इसलिए ‌मैंने अपने जिगरी दोस्त और उसके परिवार को उन जंगली कुत्तों से बचाया तभी दूसरे शेर ने अपने दोस्त की सारी बात सुन ली‌।

उस शेर ने उसी समय अपने शेर दोस्त के पास जाकर उसका धन्यवाद किया और उनकी दोस्ती फिर से एक हो गयी और उन दोनों शेरों का परिवार भी एक साथ ही मिलकर रहने लगा।

4. A Very Short Story About Friendship in Hindi – सुनील और समीर की दोस्ती

एकबार की बात है सुनील और समीर बहुत छोटे थे जब एक-दूसरे को पहली बार मिले थे। फिर दोनों एक साथ स्कूल जाने लगे फिर स्कूल के बाद कोचिंग जाने लगते और शाम को खेलते और अपना होमवर्क भी साथ ही किए करते थे।

कुछ साल बित जाने के बाद अब उनकी दोस्ती इतनी पक्की हो गई थी की वे एक-दूसरे के बिना कहीं नहीं जाते थे‌‌। हमेशा एक-दूसरे की मदद करते। उनकी दोस्ती इतनी पक्की थी की अब तो बाजार के लोग भी उन्हें जानने लगे थे।

कुछ समय बाद दोनों बड़े हो गए थे। बड़ी क्लास में होने के कारण पढ़ाई का भी टेंशन रहता ही है जिसके वजह से दोनों ठीक से मिल नहीं पा रहे थे। समीर तो पढ़ाई में काफी अच्छा था हर बार क्लास में टॉप करता पहले तो ये बात सुनील को परेशान नहीं करती थीं।

लेकिन अब सुनील थोड़ा-थोड़ा चिरने लगा था। उसे लगने लगा की अब तो समीर बड़े कॉलेज में एडमिशन लेगा और वह पीछे रह जाएगा। कुछ टाइम के बाद ऐसा ही हुआ। समीर के नंबर अच्छे होने के कारण उसने विदेश के यूनिवर्सिटी पर एडमिशन ले लिया।

समीर वहीं पर रहकर अपने आगे कि पढ़ाई करने लगा। अब दोनों के बीच उतनी बातें नहीं हुआ करती थी‌। समीर के कुछ नये दोस्त भी बनने लगे थे। यहीं बात सुनील को पसंद नहीं आती थी‌। अब तो उसे ऐसा लग रहा था जैसै किसे ने उन दोनों के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी करदी हो‌।

जब भी वे एक-दूसरे को फोन करते थे तो बातें उतनी लम्बी नहीं हुआ करती थीं। दोनों की दोस्ती जैसै खत्म सी हो गई थी‌। लेकिन कहते हैं ना बचपन के दोस्त ही हमारे असली दोस्त होते हैं। सुनील और समीर के साथ भी ऐसा ही हुआ।

सुनील के दादीजी के गुजर जाने के बाद सुनील काफी अकेले पड़ गया था। आखिर दादी के अलावा उसके पास और था ही कौन वे काफी उदास सा रहने लगा था। ना तो वो ठीक से कुछ खां रहा था नां कुछ ठीक से पी रहा था।

फिर एक दिन अचानक से समीर का फोन आता है। फोन का समीर का नाम पड़ते ही सुनील कि आंखें भर आईं। उसने जल्दी से फोन उठाया और समीर को पूरी आपबीती सुनाई। समीर भी ध्यान से उसकी बातें सुनी उस दिन बहुत समय बात दोनों ने बहुत देर तक बार करी।

जिस समय सुनील के साथ कोई नहीं था उस समय समीर सुनील के साथ था‌। दोस्ती में दूरियां तो आती रहती है फिर भी दोस्ती दिलों को मिला ही देती है।वह दोस्त ही क्या जो नाराज ना हो पर सच्ची दोस्ती दोस्तों को मना ही लेती है।

 


हमें उम्मीद है की आपको हमारी True Friendship Story in Hindi पढ़ कर जरूर मजा आया होगा। यह Short Stories in HindiShort Hindi Kahaniyan न केवल बच्चों को पढ़ने में अच्छी लगती है बल्कि यह बड़े लोगों के मनोरंजन का साधन भी बनती है और हमें अपना गुजरा हुआ कल याद दिलाती है। यदि आपको हमारी कर्मों का फल कहानियाँ पसंद आयी हो तो आप हमकों इसके बारे में नीचे comment भी कर सकते है।


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